Kashmir gets its first multiplex after 23 Year

अगर कश्मीर का कोई व्यक्ति सिनेमा हॉल में जाकर फ़िल्म देखना चाहता था, इन 32 वर्षों में तो उसे श्रीनगर से लगभग 300 किलोमीटर दूर जम्मू जाना पड़ता था, फ़िल्म देखने के लिए। क्योंकि कश्मीर में सिनेमा थिएटर पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे, और यह प्रतिबंध ना तो जम्मू कश्मीर की सरकार ने लगाया था, ना भारत सरकार ने लगाया था, ना प्रशासन ने लगाया था, बल्कि ये प्रतिबंध लगाया था आतंकवादियों ने और प्रतिबंध लगा था इस्लाम के कट्टरपंथी विचारों की वजह से।

Shut Down of Theaters in Kashmir

वर्ष 1980 से पहले जब कश्मीर में आतंकवाद का इतना प्रभाव नहीं था, तब कश्मीर बहुत अलग हुआ करता था। उस समय वहाँ ना तो महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाता था, और ना ही फिल्मों को इस्लाम विरोधी चश्मे से देखा जाता था | लेकिन जैसे जैसे कश्मीर में आतंकवाद बढ़ा वैसे वैसे महिलाएं और यहाँ तक की छोटी छोटी बच्चियां भी हिजाब और बुर्का पहनने लगीं। और फिल्मों को भी इस्लाम विरोधी करार दिया जाने लगा ,और खुलेआम श्रीनगर में यह घोषणा की गयी थी सिनेमा हॉल्स इस्लाम धर्म को खतरे में डाल रहे हैं इसलिए इन्हें बंद कर देना चाहिए। http://imranker.com

Shut Down of Liquor Shops in Jammu

वर्ष 1989 में जब आतंकवादी पूरी तरह से कश्मीर के सभी जिलों पर हावी थे, उस समय 18 अगस्त 1989 को अल्लाह टाइगर नाम के एक आतंकवादी संगठन ने कश्मीर के अखबारों में एक धमकी प्रकाशित करवाई, जिसमें लिखा था कि शराब और फिल्मों को इस्लाम धर्म में वर्जित माना गया है, इसलिए अगर कश्मीर में स्थित तमाम शराब की दुकानें और सिनेमाहॉल्स तुरंत बंद नहीं किए गए तो इन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। और यहाँ बम धमाके किए जाएंगे ,और महिलाएं अगर नहीं पहनेंगी तो उन्हें आतंकवादी संगठन भयंकर और भयानक सजा देंगे |

1st Cinema Hall in Kasmir

ये अल्लाह टाइगर्स नाम का एक आतंकवादी संगठन था उसने ऐसा कहा, हालांकि आतंकवादियों की इस धमकी के बावजूद तब कश्मीर में बहुत सारे सिनेमा हॉल्स चलते रहे, और उस वक्त कश्मीर में कुल मिलाकर 19 मूवी थिएटर थे जिनमें से नौ अकेले श्रीनगर में थे. 31 दिसंबर 1989 को जब कुछ जगहों पर अल्लाह टाइगर्स के आतंकवादियों ने हमले कर दिए, तो इसके बाद 1 जनवरी 1990 को किसी भी सिनेमा हॉल में कोई फ़िल्म नहीं दिखाई गयी और सारे शोज़ उस दिन रद्द हो गए और तभी से इन तमाम सिनेमा हॉल्स पर धूल जम रही है जिससे अब हटाने की कोशिश की जा रही है.

हालांकि कश्मीर में फिल्मों का इतिहास हमेशा से ऐसा नहीं था। श्रीनगर को उसका पहला सिनेमाहॉल आज से लगभग 90 वर्ष पहले 1932 में मिला, उस वक्त इसे वहाँ कश्मीर टॉकीज़ के नाम से जाना जाता था, और तब इस थिएटर पर कोई फ़िल्म लगती थी तो हजारों लोग यहाँ पर देखने के लिए आते थे.वर्ष 1940 की ये तस्वीर खासतौर पर आज आपके लिए आपने निकाली है जिसमें आप कश्मीर ट्रॉफीज़ के बहार लोगो की भीड़ को देख पाएंगे।

What Happens Let’s Understand

बड़ी बात ये है की उस समय सिनेमाहॉल से इस्लाम को कोई खतरा नहीं था. इसके अलावा उस समय कश्मीर की महिलाएं अपने सिर को तो ढंकती थीं, लेकिन उन्हें अपना चेहरा ढकने के लिए और बुर्का पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जाता था। और महिलाओं के फ़िल्म देखने पर भी तब कोई पाबंदी नहीं थी। ये बड़ा शानदार दौर था कश्मीर ये उस दौर की बात है जब श्रीनगर में तीन बड़े सिनेमा थिएटर्स हुआ करते थे। और वर्ष 1964 में जब मशहूर अभिनेता राजकुमार कपूर की फ़िल्म संगम वहाँ पर रिलीज हुई, तो इसकी स्क्रीनिंग श्रीनगर के सिनेमाहॉल पर हुई थी करता बड़ी संख्या में लोग इस फ़िल्म को देखने के लिए इस थिएटर में आए थे. लेकिन 1980 और 90 के दशक में जब कश्मीर में आतंकवाद बढ़ा और अलगाववादी ताकतें मजबूत हो गई, तो इन सिनेमा हॉल्स पर ताले लटका दिए गए यानी आप कह सकते हैं कि उस जमाने में कश्मीर में जो कुछ होता था आतंकवादियों की मर्जी से होता था। लेकिन अब कश्मीर को आजादी मिल रही यह एक और नई तरह की आजादी है हम कहते तो है कि 1947 में ही हम आजाद हो गए थे , लेकिन सोचिए हमारे ही देश का एक बड़ा हिस्सा ऐसा था जिसे अब तक आजादी नहीं मिली थी, और क्या आज़ादी सिनेमा देखने की आजादी उसके पास नहीं थी उसके पास वो वोट तो डाल सकता है लेकिन सिनेमा नहीं देख सकता।

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