भोपाल में रानी कमलापति का महल परमार कालीन निर्माण कला की उत्कृष्ट कृति है।

कमलापति पैलेस, भोपाल। निचली झील से सटे 1000 साल पुराने बांध पर 1772 में बना एक 7 मंजिला महल। दुख की बात है कि महल की 5 मंजिलें पानी में डूबी हुई हैं।

इसका एक कारण यह बताया जाता है कि यह महल राजा भोज के कार्यकाल 1010 से 1055 ईसवी में बने बड़े तालाब के बांध के ऊपर बनाया गया था। 

रानी कमलापति की सुंदरता का जिक्र करते हुए कहा जाता है कि वह परियों की तरह सुंदर थीं और फूलों से भी ज्यादा नाजुक थी। 

रानी कमलापति एक गौंड रानी थी। भोपाल की कई तहसीलें गौंडवाना के अंतर्गत आती थीं। रानी कमलापति के पति की उसी के रिश्तेदारों ने एक षडच्यंत्र करके हत्या कर दी थी।

इतिहासकार बताते हैं कि रानी कमलापति ने अपने पति के हत्यारों से बदला लेने के लिए सरदार दोस्त मोहम्मद से संधि की थी।

 राजा निजाम शाह ने रानी कमलापति के प्रेम स्वरूप ईस्वी 1700 में भोपाल में सात मंजिला महल का निर्माण करवाया, जो लखौरी ईंट और मिट्टी से बनवाया गया था।

यह सात मंजिला महल अपनी भव्यता, सुंदरता और खूबसूरती से लिए प्रसिद्ध था।

महल में जलती मशालों की रोशनी का प्रतिबिंब तालाब में जहाज की तरह नजर आता था। 

इस महल का निर्माण गिन्नौरगढ़ के राजा निजामशाह के कार्यकाल 1722 ईसवी में उनकी विधवा रानी कमलापति ने बनवाया था।

भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन कर दिया गया |