इनके नाम से ही प्रतीत होता है कि ये बौद्ध सन्यासी थे

जो संस्कृत जानते हैं वे समझ सकते हैं कि घटखर्पर

वररुचि कात्यायन पाणीनिय सूत्रों के प्रसिद्ध वार्तिककार थे

वराहमिहिर ईसा के 5 वी 6 छठी शताब्दी के भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे

कालिदास संस्कृत भाषा के महान कवि और नाटककार थे

कहा गया है कि वे रोग पीड़ित देवताओं की चिकित्सा करते थे

शंकु को संस्कृत का विद्वान, ज्योतिष शास्त्री माना जाता था

अमरसिंह प्रकांड विद्वान थे

वेतालभट्ट अर्थात भूत-प्रेत का पंडित कैसे हो गया